Wednesday, 5 December 2018

रात (RAAT)




मैं हूँ मुतमईन कि तुम सिर्फ मेरे हो,
तुम्हें देना है जवाब पूरी कायनात को

सहर होने के वादे मुझे मंज़ूर नही,
बड़ी मुश्किल से मनाया है इस रात को

चारसाजों की चारसाजी मेरे किस काम की,
हा तुम समझ सकते हो, बिगड़े हुए हालात को



Wednesday, 24 October 2018

गैरमौजूदगी

तुम्हारे ना होने से तबियत नासाज़ लगती है
तुम्हारे ना होने से कयामत आज लगती है

फिर क्यूँ नही हो तुम

सदा से गूँजते सन्नाटे में आवाज तुम्हारी आती है
तुम सामने बैठो फिर भी याद तुम्हारी आती है

फिर क्यूँ हो तुम

तुम्हारा होना भी आंसुओं से सराबोर करता है
तुम्हारे ना होने के ख़्वाब से दिल बहुत डरता है

तुम्हारे बारे में वक़्त को एक बात समझाई जाए
तुम्हारी गैरमौजूदगी में मेरी उम्र ना बढ़ाई जाए

क्योंकि तुम्हारे होने से जीना शुरू होता है
मैं कहीं भी हूँ मेरे साथ तू होता है