My ideas about you
casanjeevsaini.blogspot.com
Wednesday, 5 December 2018
रात (RAAT)
क्या रोक सकते हो तुम मेरे लिए इस रात को
क्या बोल सकते हो तुम फिर से उसी बात को
कुछ और कह दिया कुछ और कहते हुए,
तुमने छोड़ दिया सर-ए-राह जज्बात को
मैं हूँ मुतमईन कि तुम सिर्फ मेरे हो,
तुम्हें देना है जवाब पूरी कायनात को
सहर होने के वादे मुझे मंज़ूर नही,
बड़ी मुश्किल से मनाया है इस रात को
चारसाजों की चारसाजी मेरे किस काम की,
हा तुम समझ सकते हो, बिगड़े हुए हालात को
रूह रुठ जाती है, उंगलियां टूट जाती है
बहुत मुश्किल है छुड़वाना अब हाथ को
Link to Video - Raat
गैरमौजूदगी
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment