Sunday, 16 October 2022

सवाल 

ये सवाल भी कितना अजीब सवाल है
महोब्बत है या नही अजीब बवाल है

एक दिन सोचने बैठों दुनिया भर की बातें
गिले शिकवें शिकायतें, रो कर कटी रातें

यूँ लगता है कि हम तुम कहीं है ही नही
जो चल रहा है बस चल रहा है गलत या सही

यूँहीं बसर हो जाती गर तुम्हारे ना होने से
तो किसने रोका था मुझे रात भर सोने से

तेरे संग चल नही पाऊंगा तो भागूँगा कैसे
तेरे बिन सो नही पाऊंगा तो जागूँगा कैसे

मैं जागना चाहता हूँ मुझे सिर्फ सोने ना दे
मुझे ढूंढ ले फिर एक बार मुझे खोने ना दे

संजीव

No comments:

Post a Comment