सवाल
ये सवाल भी कितना अजीब सवाल है
महोब्बत है या नही अजीब बवाल है
एक दिन सोचने बैठों दुनिया भर की बातें
गिले शिकवें शिकायतें, रो कर कटी रातें
यूँ लगता है कि हम तुम कहीं है ही नही
जो चल रहा है बस चल रहा है गलत या सही
यूँहीं बसर हो जाती गर तुम्हारे ना होने से
तो किसने रोका था मुझे रात भर सोने से
तेरे संग चल नही पाऊंगा तो भागूँगा कैसे
तेरे बिन सो नही पाऊंगा तो जागूँगा कैसे
मैं जागना चाहता हूँ मुझे सिर्फ सोने ना दे
मुझे ढूंढ ले फिर एक बार मुझे खोने ना दे
संजीव
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