Sunday, 16 October 2022

शायर


थे ख़्वाब बहुत जीवन में सजाने को
तुमने चुने तीर मेरे ज़ख्म सुलगाने को

पहुँच पायेगा ना जो अब किसी अंजाम तलक
अधूरा छोड़ चला हूँ मैं उस फसाने को

तुमने पढ़ा ही नही जो लिखा था तुम्हारे लिए
दुनिया शायर कहती है अब तेरे दीवाने को

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