राहुल
कहा से शुरू किया जाए ये ठीक वैसा ही प्रश्न है कि कहा से शुरू हुआ था, हज़ारों मील लम्बा सफर साथ तय करने के बाद आज वक़्त के हाशिये पर खड़े है अनगिनत यादों के साथ
जीवन के ना जाने कितने ही रंग हम ने साथ मे देखें है
उन पलों की यादें भी साथ है जहां पहुँच कर लगा कि अब इस से आगे जीवन है ही नही,
हमने साथ मे देखा है अजीज लोगों को जाते हए दुनिया से, हमारी दुनिया से
हम है गवाह सैंकडों लोगों की बर्बादी भरे जश्न के,
हम गिन नही पाएंगे साथ मे पिये गए चाय के कप
जहाँ से हम चले वहाँ हमारे साथ कुछ लोग थे जहाँ हम है वहाँ भी हमारे साथ कुछ लोग है लेकिन सब अलग
इस अथाह समंदर से फैले जीवन मे सब बदला बस नाख़ुदा ना बदला
सीमाओं से परे इस सफर पर हमारी यात्रा बदस्तूर जारी है
जारी रहेगी
सांस रहे ना रहे यारी रहेगी
संजीव "राहुल"
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