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वो एक शख़्श
अब कहाँ हम अपने दुख किसी से कह सकते हैं
अब कहाँ हम किसी के आंसुओं में बह सकते हैं
वो बातें अब बीते जमाने सी लगती हैं
उन बातों को अब हम कहानियाँ कह सकते हैं
अब सोचने पर भी उसका चेहरा याद नहीं आता
उसने ही कहा था हम दोस्त तो रह सकते हैं
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