Wednesday, 24 October 2018

गैरमौजूदगी

तुम्हारे ना होने से तबियत नासाज़ लगती है
तुम्हारे ना होने से कयामत आज लगती है

फिर क्यूँ नही हो तुम

सदा से गूँजते सन्नाटे में आवाज तुम्हारी आती है
तुम सामने बैठो फिर भी याद तुम्हारी आती है

फिर क्यूँ हो तुम

तुम्हारा होना भी आंसुओं से सराबोर करता है
तुम्हारे ना होने के ख़्वाब से दिल बहुत डरता है

तुम्हारे बारे में वक़्त को एक बात समझाई जाए
तुम्हारी गैरमौजूदगी में मेरी उम्र ना बढ़ाई जाए

क्योंकि तुम्हारे होने से जीना शुरू होता है
मैं कहीं भी हूँ मेरे साथ तू होता है

Tuesday, 12 December 2017

पापा और हार्ट अटैक (26/09/2016)

चलते खेल में जब पर्दा गिरने लगता है
जीवन घने अंधेरों से घिरने लगता है

अब तुम्हे कौन बताये के तुम कितना जरुरी हो
तुम्हारे साथ कोई भी तो हसरत नही जो अधूरी हो

यूँ टूटती डोर में आँसू बहने लगते है
पत्थर से दिखने वाले लोग ढहने लगते है

मैं कायर जानता ही क्या हु सिवाये हंसने के
मुझ में हुनर ही नही रो देने के सिसकने के

ये भी तो एक रंग ही था जीवन के खजाने का
बहुत भयानक है, ख्याल भी तेरे जाने का


संजीव (27/09/2016; 01:48 am)
रविंद्रा हॉस्पिटल हिसार

Wednesday, 29 November 2017

कला और विज्ञान

उसने झुन्झुलाते हुए कहा “अब रख भी दो किताब रात के 2 बजे हुए है”

किताबे से उसके चहरे तक जाते हुए मैंने कहा “.........................................मेरे पास और है ही क्या”

मेरी तन्हाई में डूबी हुई नजरें उसकी नींद से भरी आँखों में घुलते हुए मेरी सच्चाई बयाँ कर रही थी, भावनाओं के समुंदर में उफान के साथ मैं बड़ी उम्मीद से अपनी किसी नई रचना के लिए उसके जवाब की तालाश में था |
जवाब आ गया |

“सुनो ! कम से कम लाइट तो बंद कर दो “

मैं उसे समझाना चाहता हूँ की इस आधुनिक युग में किताबों ने अपना अस्तित्व बचा रखा है और इस किताब के चलते इस लाइट को इतना मान सम्मान बख्शा गया है, अँधेरे में पढने वाली तकनीक अभी मेरे अंदर जगह बना नही पाई है | खैर छोड़ों इतनी रात को क्या विज्ञानिक बनना, पाठक से लेखक बनना ही बहुत मुश्किल प्रक्रिया है |

“अँधेरे में मैं खुद को पढने लगता हूँ, फिर सोचता हूँ हज़ार कमियां है मुझे में कुछ ऐसा क्यों न पढू जिसमे कोई कमी नही है”

मुहँ बनाते हुए जवाब आया “अजीब मुसीबत है|”

“उन्हीं से पार पाने की कोशिश है ये, मुन्सी प्रेम चंद ने आज से 100 साल पहले जो लिखा वो आज भी सच है, मैं अगले 10 दिन भी सोच पाऊ तो गज़ब हो जाएगा”

ताना कसते हुए एक और जवाब आया “गज़ब तब होगा जब सुबह ऑफिस के समय तक सोते रह जाओगे”

“सो तो मैं सालों से रहा हूँ , किसी ऐसे छंद की तलाश में हूँ जो जगा दे मुझे”

“मिले तो मुझे भी बताना, सुबह आपको जगाने के लिए पढ़ दूंगी”

पत्नी जी अब सो चुकी है मैं विचार में हूँ, रात सिर्फ सोने के लिए थोड़े है यही तो वो समय है जब मैं खुद को अपने करीब महसूस करता हूँ, ये सरपट दौड़ता जीवन मुझे कहा लेकर जाएगा?
शायद मुझ से कोसों दूर जहाँ मैं खुद को सुन ना पाउँगा | जीवन की इस भाग दौड़ से भरी सोच से पलके भारी होनी शुरू हो गई |

करवट बदलते हुए उसने फिर कहा “लाइट बंद कर दो”


संजीव

Tuesday, 18 December 2012

She iz mine

Jo pari si bani mere khayalo pe chhai thi..
Bas kuch din pahle dulhan ban mere ghar aai thi..


Uska mere sath hona bahut pyara ahsaas hai..
in khas logo ki bhid me wo sab se khas hai..


Mere liye wo yun hai jaise barso purana naata hai..
Rishto ko jeena use bhi khub aata hai...


Dekhu gar gaur se use..parchai tumhari dikhti hai...
Maa, Mujhe teri bahu bahut pyaari lagti hai

Sunday, 18 September 2011

its having worth for me

Bde dino baad kuch acha hone ja rha hai,
Khatam hua intzaar ke koi milne aa rha hai..

Uska khyalo me jhakna mujhe pyara lgta hai,
Wo shakas mujhe ab beshara lagta hai..

Jajbaato se dulhan mana hai tujhe mane,
Ke mane hasin khawab se piroye hai tere Gahne..

Ab lagta hai koi dhul is kitab se uda jayega,
Wo pyar karta hai mujhe, mujh me sma jayega....

Monday, 5 September 2011

Oh God...!

Sayad Ab Ye Kahna Jaruri Hai
Ki Tere Bina Ye Zindagi Adhuri Hai

Har Ghadi Tujhe Dekhne Ka Dil Karta Hai
Teri Yaad Me Ak Pagal Har Roz Marta Hai

Ab Ye Aalam Hai Ki Na Roya Jaye Na Soya Jaye
Dil Karta Hai Ek Hasin Sa Sapna Sanjoya Jaye

Ak Panchi Ka Mere Aangan me Kuch Din Ka Basera Hai
Kyun Wo Mera Nhi Ho Sakta Jo Na Jane Kab Se Mera Hai

Tujhe Kho Dunga Ek Din Ye Soch Mera Dil Darta Hai
Tu Nhi Hai Mere Nasib Me, Matlab Khuda Bhi Galti Karta hai

Monday, 7 March 2011

A Bad Day

Kuch Baat Hui Thi Jo Main Sah Nhi Paya
Jo Kia Mane Bina Kiye Rah Nhi Paya

Main Galat Tha Main Shi Tha Mera Aham Ara Tha
Mera Sab Kuch Mere Samne Ashaye Khara Tha

Mujhe Lga Ki Main Khud Se Juda Hone Wala Hu
Teri Pyari Si Aankho Ko Bhigone Wala Hu

Tu Roi To Socha Tujhe Kaise Mna Lu
Log Dekh Rhe Hai Kyo Na Tujhe Khud Me Chupa Lu

Tu Maan Ja In Sab Par Bas Nhi Mera
Tu Maan Ja Tu Maan Tu Sab Kuch Hai Mera

Main Kya Tha Aur Kya Ho Rha Hu
Main Ro Chuka Hu Thak Ke So Rha Hu