Sunday, 16 October 2022

चाँदनी रात का अंधेरा


चाँदनी रात में साहिल पर खड़ी टूटी कश्ती
बस इतनी सी ही है मेरी हस्ती

दूर से रोशनी नसीब हो रही है,
सन्नाटों से लिपटी मेरी रूह रो रही है

हिलते पानी में हिल रहा है शरीर
खो चुका हूँ मैं खुद को, सो रहा है जमीर

अब आएगी एक लहर और डूबा देगी मुझे
यूँ ना उम्मीद होने की कुदरत सजा देगी मुझे

बर्फ ओढ़ें है आग, कुछ देर में मेरा दम निकलेगा
ये आखरी रात कटी तो पहला दिन निकलेगा

फिर कुछ रात मैं सो नही पाऊंगा


फिर किसी रोज सोचूंगा मैं तुम्हारे बारें में
फिर किसी रात तुम्हारा ख़्वाब सजाऊंगा

फिर कुछ रात मैं सो नही पाऊंगा.........

मैं करूँगा याद उस दिन को भी जब तू नही था
मैं खुद भी तुम्हारे होने तलक की गई उदेड बुन में ही था

मैं मैं ना हो पाया उसके बाद कभी
मैं खुद को ढूंढता रहता था तुम्हारे साथ भी

एक बार मिलना एक बार फिर मिलना
कभी ना खत्म होने वाला सिलसिला खत्म होना ही था

ये ठीक वैसा ही था जैसे लहरों ने कहा दिया किनारों से
कि अब आ नही पाएंगी वो 

भला लहरे कब किनारों का दामन छोड़ पाती है
मगर इस बार ये भी हुआ

मुझे अब तुम्हारे साथ साथ खुद की भी कमी खलती है
कश्तियाँ अब सिर्फ हवा के सहारे चलती है

इस बहती हवा में एक दिया जलाऊंगा
फिर कुछ रात मैं सो नही पाऊंगा
सवाल 

ये सवाल भी कितना अजीब सवाल है
महोब्बत है या नही अजीब बवाल है

एक दिन सोचने बैठों दुनिया भर की बातें
गिले शिकवें शिकायतें, रो कर कटी रातें

यूँ लगता है कि हम तुम कहीं है ही नही
जो चल रहा है बस चल रहा है गलत या सही

यूँहीं बसर हो जाती गर तुम्हारे ना होने से
तो किसने रोका था मुझे रात भर सोने से

तेरे संग चल नही पाऊंगा तो भागूँगा कैसे
तेरे बिन सो नही पाऊंगा तो जागूँगा कैसे

मैं जागना चाहता हूँ मुझे सिर्फ सोने ना दे
मुझे ढूंढ ले फिर एक बार मुझे खोने ना दे

संजीव

Sunday, 20 January 2019

"तुम"

सही कह रहे हो तुम
मेरी रागों में बह रहे हो तुम,
मुझे बना चुके हो आशियाँ अपना
मेरे दिल मे रह रहे हो तुम


मैं कहीं खो जाना चाहूं
तेरी गोद मे रख सर सो जाना चाहूं
जमाने भर से तोड़ के रिश्ते
सिर्फ तुझे ही पाना चाहूँ


ये दर्द, ये सजा ये जश्न ये मजा
सब इश्क़ में सह रहे हो तुम
सही कह रहे हो तुम
मेरी रागों में बह रहे हो तुम


रूठ जाओ अगर तो ये जीवन वीरान
जो हंस दो तो फिर खिलखिलाए जहान

जो ना मिलने दे मुझे तुझ से
वो सब मेरे लिए सिर्फ शमशान


तू हो हर जगह, तू हो हर सुबह
तू जो ना हो तो मेरी सोचें परेशान


जो कहना चाहते हो मुझ से
सिर्फ खुद से कह रहे हो तुम
मुझे बना चुके हो आशियाँ अपना
मेरे दिल मे रह रहे हो तुम


सही कह रहे हो तुम
मेरी रागों में बह रहे हो तुम

Wednesday, 5 December 2018

रात (RAAT)




मैं हूँ मुतमईन कि तुम सिर्फ मेरे हो,
तुम्हें देना है जवाब पूरी कायनात को

सहर होने के वादे मुझे मंज़ूर नही,
बड़ी मुश्किल से मनाया है इस रात को

चारसाजों की चारसाजी मेरे किस काम की,
हा तुम समझ सकते हो, बिगड़े हुए हालात को



Wednesday, 24 October 2018

गैरमौजूदगी

तुम्हारे ना होने से तबियत नासाज़ लगती है
तुम्हारे ना होने से कयामत आज लगती है

फिर क्यूँ नही हो तुम

सदा से गूँजते सन्नाटे में आवाज तुम्हारी आती है
तुम सामने बैठो फिर भी याद तुम्हारी आती है

फिर क्यूँ हो तुम

तुम्हारा होना भी आंसुओं से सराबोर करता है
तुम्हारे ना होने के ख़्वाब से दिल बहुत डरता है

तुम्हारे बारे में वक़्त को एक बात समझाई जाए
तुम्हारी गैरमौजूदगी में मेरी उम्र ना बढ़ाई जाए

क्योंकि तुम्हारे होने से जीना शुरू होता है
मैं कहीं भी हूँ मेरे साथ तू होता है

Tuesday, 12 December 2017

पापा और हार्ट अटैक (26/09/2016)

चलते खेल में जब पर्दा गिरने लगता है
जीवन घने अंधेरों से घिरने लगता है

अब तुम्हे कौन बताये के तुम कितना जरुरी हो
तुम्हारे साथ कोई भी तो हसरत नही जो अधूरी हो

यूँ टूटती डोर में आँसू बहने लगते है
पत्थर से दिखने वाले लोग ढहने लगते है

मैं कायर जानता ही क्या हु सिवाये हंसने के
मुझ में हुनर ही नही रो देने के सिसकने के

ये भी तो एक रंग ही था जीवन के खजाने का
बहुत भयानक है, ख्याल भी तेरे जाने का


संजीव (27/09/2016; 01:48 am)
रविंद्रा हॉस्पिटल हिसार